शान्ति पर्व  अध्याय १४

वैशम्पाय़न उवाच

प्रशाधि पृथिवीं देवीं प्रजा धर्मेण पालय़न् |  ३८   क
सपर्वतवनद्वीपां मा राजन्विमना भव ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति