अनुशासन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

यजतां यज्ञकामानां यज्ञैर्विपुलदक्षिणैः |  ६०   क
या गतिर्दैवतैर्दिव्या सा गतिस्त्वं सनातन ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति