अनुशासन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

जप्यहोमव्रतैः कृच्छ्रैर्निय़मैर्देहपातनैः |  ६१   क
तप्यतां या गतिर्देव वैराजे सा गतिर्भवान् ||  ६१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति