अनुशासन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

अन्तर्हिते भगवति सानुगे यादवेश्वर |  ७२   क
ऋषिराश्रममागम्य ममैतत्प्रोक्तवानिह ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति