आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

अवुद्ध्वा यन्न गृह्णीथास्तन्मे सुमहदप्रिय़म् |  १०   क
नूनमश्रद्दधानोऽसि दुर्मेधाश्चासि पाण्डव ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति