आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १६

व्राह्मण उवाच

जातीमरणतत्त्वज्ञं कोविदं पुण्यपापय़ोः |  २०   क
द्रष्टारमुच्चनीचानां कर्मभिर्देहिनां गतिम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति