आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १६

व्राह्मण उवाच

अशुभा गतय़ः प्राप्ताः कष्टा मे पापसेवनात् |  ३०   क
काममन्युपरीतेन तृष्णय़ा मोहितेन च ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति