आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १६

व्राह्मण उवाच

नाहं पुनरिहागन्ता लोकानालोकय़ाम्यहम् |  ३८   क
आ सिद्धेरा प्रजासर्गादात्मनो मे गतिः शुभा ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति