आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १६

व्राह्मण उवाच

व्रह्मदेय़ाग्रहारांश्च परिहारांश्च पार्थिव |  १५   क
पूर्वराजातिसर्गांश्च पालय़त्येव पाण्डवः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति