आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १६

व्राह्मण उवाच

तैरिय़ं पुरुषव्याघ्रैर्विद्यावाहुवलान्वितैः |  ७   क
पृथिवी निहता सर्वा सहय़ा सरथद्विपा ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति