सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

स काशिराजस्य सुते यमजे भरतर्षभ |  १६   क
उपय़ेमे महावीर्यो रूपद्रविणसंमते ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति