सभा पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

न मृत्योः समय़ं विद्म रात्रौ वा यदि वा दिवा |  २   क
न चापि कञ्चिदमरमय़ुद्धेनापि शुश्रुमः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति