menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २४९
chevron_left
chevron_right
कोटिकाश्य उवाच
वय़ं हि मानं तव वर्धय़न्तः; पृच्छाम भद्रे प्रभवं प्रभुं च |  ५   क
आचक्ष्व वन्धूंश्च पतिं कुलं च; तत्त्वेन यच्चेह करोषि कार्यम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति