सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

अथ काक्षीवतः पुत्रं गौतमस्य महात्मनः |  २२   क
शुश्राव तपसि श्रान्तमुदारं चण्डकौशिकम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति