सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

तत्प्रगृह्य मुनिश्रेष्ठो हृदय़ेनाभिमन्त्र्य च |  २९   क
राज्ञे ददावप्रतिमं पुत्रसम्प्राप्तिकारकम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति