उद्योग पर्व  अध्याय ८४

धृतराष्ट्र उवाच

तस्मै पूजां प्रय़ोक्ष्यामि दाशार्हाय़ महात्मने |  ५   क
प्रत्यक्षं तव धर्मज्ञ तन्मे कथय़तः शृणु ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति