सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

एकाक्षिवाहुचरणे अर्धोदरमुखस्फिजे |  ३५   क
दृष्ट्वा शरीरशकले प्रवेपाते उभे भृशम् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति