सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

ते चतुष्पथनिक्षिप्ते जरा नामाथ राक्षसी |  ३८   क
जग्राह मनुजव्याघ्र मांसशोणितभोजना ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति