भीष्म पर्व  अध्याय ८९

सञ्जय़ उवाच

नरा नरान्समासाद्य क्रोधरक्तेक्षणा भृशम् |  ३०   क
उरांस्युरोभिरन्योन्यं समाश्लिष्य निजघ्निरे ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति