वन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

हतं श्रुत्वा महावाहो मय़ा श्रौतश्रवं नृपम् |  २   क
उपाय़ाद्भरतश्रेष्ठ शाल्वो द्वारवतीं पुरीम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति