menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
उद्योग पर्व
अध्याय १६
chevron_left
chevron_right
वृहस्पतिरु उवाच
एवमुक्तैर्वर्धितश्चापि देवै; राजाभवन्नहुषो घोरवीर्यः |  २५   क
त्रैलोक्ये च प्राप्य राज्यं तपस्विनः; कृत्वा वाहान्याति लोकान्दुरात्मा ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति