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भीष्म पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
महाराज मनुष्येषु निन्द्यं यः सर्वमाचरेत् |  ३   क
स वध्यः सर्वलोकस्य निन्दितानि समाचरन् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति