आदि पर्व  अध्याय ३७

कृश उवाच

स राजा मृगय़ां यातः परिक्षिदभिमन्युजः |  ५   क
ससार मृगमेकाकी विद्ध्वा वाणेन पत्रिणा ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति