menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
हा तात हा सुतेत्येवं तदा वाचः सुदारुणाः |  ८४   क
विक्रोशमानश्चान्योन्यं जनो गां पर्यटिष्यति ||  ८४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति