कर्ण पर्व  अध्याय २४

व्रह्मो उवाच

इमं चाप्यपरं भूय़ इतिहासं निवोध मे |  १२९   क
पितुर्मम सकाशे यं व्राह्मणः प्राह धर्मवित् ||  १२९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति