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वन पर्व
अध्याय १८९
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मार्कण्डेय़ उवाच
तच्छीलमनुवर्त्स्यन्ते मनुष्या लोकवासिनः |  ३   क
विप्रैश्चोरक्षय़े चैव कृते क्षेमं भविष्यति ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति