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द्रोण पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
यदि त्वसुकरं लोके कर्म कुर्याम संय़ुगे |  ३६   क
इष्टान्पुण्यकृतां लोकान्प्राप्नुय़ाम न संशय़ः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति