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द्रोण पर्व
अध्याय १६
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अर्जुन उवाच
हते तु पुरुषव्याघ्रे रणे सत्यजिति प्रभो |  ४५   क
सर्वैरपि समेतैर्वा न स्थातव्यं कथञ्चन ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति