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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
नवं ततोऽन्यत्समरे प्रगृह्य; राजा धनुर्घोरतरं महात्मा |  २१   क
शल्यं तु विद्ध्वा निशितैः समन्ता; द्यथा महेन्द्रो नमुचिं शिताग्रैः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति