विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

तां स वेलामिवोद्धूतां शरवृष्टिं समुत्थिताम् |  १४   क
व्यधमत्साय़कैर्भीष्मो अर्जुनं संनिवारय़त् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति