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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
तत्कर्म भीमस्य समीक्ष्य हृष्टा; स्ते पाण्डवानां प्रवरा रथौघाः |  ३२   क
नादं च चक्रुर्भृशमुत्स्मय़न्तः; शङ्खांश्च दध्मुः शशिसंनिकाशान् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति