menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय १६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स धर्मराजो निहताश्वसूतं; क्रोधेन दीप्तज्वलनप्रकाशम् |  ३५   क
दृष्ट्वा तु मद्राधिपतिं स तूर्णं; समभ्यधावत्तमरिं वलेन ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति