menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय १६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
हतोऽस्यसावित्यभिगर्जमानो; रुद्रोऽन्तकाय़ान्तकरं यथेषुम् |  ४७   क
प्रसार्य वाहुं सुदृढं सुपाणिं; क्रोधेन नृत्यन्निव धर्मराजः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति