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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
तां सर्वशक्त्या प्रहितां स शक्तिं; युधिष्ठिरेणाप्रतिवार्यवीर्याम् |  ४८   क
प्रतिग्रहाय़ाभिननर्द शल्यः; सम्यग्घुतामग्निरिवाज्यधाराम् ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति