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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
सा तस्य मर्माणि विदार्य शुभ्र; मुरो विशालं च तथैव वर्म |  ४९   क
विवेश गां तोय़मिवाप्रसक्ता; यशो विशालं नृपतेर्दहन्ती ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति