menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय १६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स तथा भिन्नसर्वाङ्गो रुधिरेण समुक्षितः |  ५३   क
प्रत्युद्गत इव प्रेम्णा भूम्या स नरपुङ्गवः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति