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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थस्य वाणौघैरावृताः सैनिकास्तव |  ५८   क
निमीलिताक्षाः क्षिण्वन्तो भृशमन्योन्यमर्दिताः |  ५८   ख
संन्यस्तकवचा देहैर्विपत्राय़ुधजीविताः ||  ५८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति