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शल्य पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
ततोऽस्य दीप्यमानेन सुदृढेन शितेन च |  ६२   क
प्रमुखे वर्तमानस्य भल्लेनापाहरच्छिरः ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति