आदि पर्व  अध्याय १६०

गन्धर्व उवाच

स सोममति कान्तत्वादादित्यमति तेजसा |  १९   क
वभूव नृपतिः श्रीमान्सुहृदां दुर्हृदामपि ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति