आदि पर्व  अध्याय १६०

गन्धर्व उवाच

स कदाचिदथो राजा श्रीमानुरुय़शा भुवि |  २१   क
चचार मृगय़ां पार्थ पर्वतोपवने किल ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति