आदि पर्व  अध्याय १६०

गन्धर्व उवाच

स मृताश्वश्चरन्पार्थ पद्भ्यामेव गिरौ नृपः |  २३   क
ददर्शासदृशीं लोके कन्यामाय़तलोचनाम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति