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शान्ति पर्व
अध्याय १६०
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वैशम्पाय़न उवाच
अकृष्टाश्चैव हंसाश्च ऋषय़ोऽथाग्निय़ोनिजाः |  २५   क
वानप्रस्थाः पृश्नय़श्च स्थिता व्रह्मानुशासने ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति