menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
काञ्चनैर्यज्ञभाण्डैश्च भ्राजिष्णुभिरलङ्कृतम् |  ३५   क
वृतं देवगणैश्चैव प्रवभौ यज्ञमण्डलम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति