शान्ति पर्व  अध्याय १६०

वैशम्पाय़न उवाच

तथा व्रह्मर्षिभिश्चैव सदस्यैरुपशोभितम् |  ३६   क
तत्र घोरतमं वृत्तमृषीणां मे परिश्रुतम् ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति