menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
छिन्दन्भिन्दन्रुजन्कृन्तन्दारय़न्प्रमथन्नपि |  ५५   क
अचरद्दैत्यसङ्घेषु रुद्रोऽग्निरिव कक्षगः ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति