menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १६०
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
तद्वै ज्योतींषि सर्वाणि प्राप्य भासन्ति नोऽपि च |  २०   क
स्वय़ं विभुरदीनात्मा तत्र ह्यभिविराजते ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति