आदि पर्व  अध्याय ४७

सूत उवाच

एवमुक्त्वा ततः श्रीमान्मन्त्रिभिश्चानुमोदितः |  १   क
आरुरोह प्रतिज्ञां स सर्पसत्राय़ पार्थिवः |  १   ख
व्रह्मन्भरतशार्दूलो राजा पारिक्षितस्तदा ||  १   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति