उद्योग पर्व  अध्याय १६०

सञ्जय़ उवाच

वासुदेवद्वितीय़े हि मय़ि क्रुद्धे नराधिप |  २०   क
आशा ते जीविते मूढ राज्ये वा केन हेतुना ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति