आदि पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

तेन शापेन धर्मोऽपि शूद्रय़ोनावजाय़त |  ८१   क
विद्वान्विदुररूपेण धार्मी तनुरकिल्विषी ||  ८१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति