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शान्ति पर्व
अध्याय १५८
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भीष्म उवाच
परेषां यत्र दोषः स्यात्तद्गुह्यं सम्प्रकाशय़ेत् |  ९   क
समानेष्वेव दोषेषु वृत्त्यर्थमुपघातय़ेत् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति